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Thursday, 27 February 2014

बियॉन्ड बॉलीवुड

बियॉन्ड बॉलीवुड

वाशिंगटन डीसी स्थित नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री इन दिनों सुर्खियों में है, क्योंकि वहां भारतीय मूल के अमेरिकियों के लंबे प्रवास के इतिहास, उनके धार्मिक एवं अध्यात्मिक प्रभाव एवं शिक्षा, विज्ञान एवं खेल के क्षेत्र में उपलब्धियों को रेखांकित करने के लिए ′बियॉन्ड बॉलीवुडः इंडियन अमेरिकन शेप द नेशन′ नामक एक प्रदर्शनी आयोजित की गई है।

यह प्रदर्शनी 16 अगस्त, 2015 तक जारी रहेगी। इस प्रदर्शनी में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि अमेरिका को बनाने में प्रवासी भारतीयों का क्या योगदान रहा है। माना जाता है कि पहली बार 1790 में भारतीय प्रवासी अमेरिका गए थे, जिन्होंने अमेरिका की पहली रेल लाइन के निर्माण एवं खेती में योगदान किया था

 और जब एशिया से आने वाले लोगों के प्रवास को वहां हतोत्साहित किया जाने लगा, तो उन्होंने अमेरिकी नागरिकता के लिए संघर्ष भी किया। तबसे लेकर हॉटमेल के निर्माण तक प्रवासी भारतीय अमेरिकियों के योगदान की अनगिनत कहानियों को इस प्रदर्शनी का हिस्सा बनाया गया है।

 शिक्षा, चिकित्सा, मनोरंजन, खेल, फैशन डिजाइनिंग आदि तमाम क्षेत्रों में प्रवासी भारतीयों ने अमेरिका का नाम रोशन किया है। इस प्रदर्शनी में सुपर बाउल जीतने वाले पहले भारतीय अमेरिकी का फुटबॉल हेलमेट, भारतीय अमेरिकी डिजाइनर नईम खान द्वारा तैयार की गई मिशेल ओबामा की ड्रेस, जिमनास्ट मोहिनी भारद्वाज द्वारा एथेंस में जीते गए सिल्वर ओलंपिक मेडल, 1985 में बालू नटराजन द्वारा जीती गई

पहली स्पेलिंग बी ट्राफी, 1957 में पहली बार जीतकर अमेरिकी संसद में पहुंचे सांसद दलीप सिंह सौंद की प्रचार सामग्री के साथ-साथ नामचीन भारतीय अमेरिकियों की पारिवारिक तस्वीरों आदि को प्रदर्शित किया गया है।

वाशिंगटन डीसी स्थित नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री इन दिनों सुर्खियों में है, क्योंकि वहां भारतीय मूल के अमेरिकियों के लंबे प्रवास के इतिहास, उनके धार्मिक एवं अध्यात्मिक प्रभाव एवं शिक्षा, विज्ञान एवं खेल के क्षेत्र में उपलब्धियों को रेखांकित करने के लिए ′बियॉन्ड बॉलीवुडः इंडियन अमेरिकन शेप द नेशन′ नामक एक प्रदर्शनी आयोजित की गई है।

यह प्रदर्शनी 16 अगस्त, 2015 तक जारी रहेगी। इस प्रदर्शनी में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि अमेरिका को बनाने में प्रवासी भारतीयों का क्या योगदान रहा है। माना जाता है कि पहली बार 1790 में भारतीय प्रवासी अमेरिका गए थे, जिन्होंने अमेरिका की पहली रेल लाइन के निर्माण एवं खेती में योगदान किया था

 और जब एशिया से आने वाले लोगों के प्रवास को वहां हतोत्साहित किया जाने लगा, तो उन्होंने अमेरिकी नागरिकता के लिए संघर्ष भी किया। तबसे लेकर हॉटमेल के निर्माण तक प्रवासी भारतीय अमेरिकियों के योगदान की अनगिनत कहानियों को इस प्रदर्शनी का हिस्सा बनाया गया है।

 शिक्षा, चिकित्सा, मनोरंजन, खेल, फैशन डिजाइनिंग आदि तमाम क्षेत्रों में प्रवासी भारतीयों ने अमेरिका का नाम रोशन किया है। इस प्रदर्शनी में सुपर बाउल जीतने वाले पहले भारतीय अमेरिकी का फुटबॉल हेलमेट, भारतीय अमेरिकी डिजाइनर नईम खान द्वारा तैयार की गई मिशेल ओबामा की ड्रेस, जिमनास्ट मोहिनी भारद्वाज द्वारा एथेंस में जीते गए सिल्वर ओलंपिक मेडल, 1985 में बालू नटराजन द्वारा जीती गई

पहली स्पेलिंग बी ट्राफी, 1957 में पहली बार जीतकर अमेरिकी संसद में पहुंचे सांसद दलीप सिंह सौंद की प्रचार सामग्री के साथ-साथ नामचीन भारतीय अमेरिकियों की पारिवारिक तस्वीरों आदि को प्रदर्शित किया गया है।

Wednesday, 26 February 2014

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रियांग जनजाति

रियांग जनजाति

इन दिनों मिजोरम में बहुसंख्यक मिजो एवं अल्पसंख्यक रियांग (जिसे ब्रु जनजाति भी कहा जाता है) जनजाति के बीच तनाव काफी गहरा गया है और कथित तौर पर रियांग जनजाति के लोग पलायन के लिए मजबूर किए जा रहे हैं। दोनों समुदायों के बीच संघर्ष कोई नई बात नहीं है। पिछले 17 वर्षों से यह संघर्ष सुलगता रहा है। 

वर्ष 1997 एवं 2009 में भी संघर्षपूर्ण स्थिति के चलते रियांग जनजाति के हजारों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर भागना पड़ा था। रियांग देश की 75 आदिम जनजातियों में से एक है। कहा जाता है कि यह म्यांमार के शान राज्य के पहाड़ी इलाकों से आकर त्रिपुरा में बसी है। त्रिपुरा के अलावा यह जनजाति मिजोरम, असम, मणिपुर और बांग्लादेश में भी पाई जाती है।

 वे रियांग बोली बोलते हैं, जो तिब्बत-बर्मी भाषा परिवार का अंग है। पूर्वोत्तर की अन्य जनजातियों की तरह रियांग जनजाति के लोगों की शक्ल भी मंगोलों से मिलती-जुलती है। त्रिपुरी के बाद यह त्रिपुरा की दूसरी सबसे बड़ी जनजाति है। रियांग जनजाति मुख्यतः दो बड़े गुटों में विभाजित है-मेस्का और मोलसोई। यह मुख्यतः कृषि पर निर्भर रहने वाली जनजाति है।

पहले ये लोग ज्यादातर झूम खेती करते थे, पर अब वे खेती के आधुनिक तौर-तरीके अपना रहे हैं। पढ़े-लिखे लोगों ने सरकारी नौकरी में भी जगह बनाई है। इस समुदाय के कई लोग नौकरशाही में उच्च पदों पर पहुंचे हैं, और कुछ ने अपना व्यवसाय भी शुरू किया है। 

अपने ही समुदाय में शादी करने वाली यह जनजाति पारंपरिक वेशभूषा धारण करती है और नृत्य इसके जीवन का अभिन्न अंग है। धार्मिक रूप से हिंदू धर्म के वैष्णव संप्रदाय को मानने वाली रियांग जनजाति के प्रमुख को राय कहा जाता है, जो विवाह एवं तलाक की अनुमति देता है और आपसी झगड़े निपटाता है।
खुली खिड़की

क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र

क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र

केरल में पहली बार अंतरराष्ट्रीय लोकोत्सव का आयोजन किया गया है। इसका आयोजन राज्य सरकार ने पूर्वी और दक्षिणी सांस्कृतिक क्षेत्र के सहयोग से किया है। देश के संस्कृति मंत्रालय के अनुसार हमारे देश में सात सांस्कृतिक क्षेत्र हैं

-दक्षिणी सांस्कृतिक क्षेत्र (तंजावुर, तमिलनाडु), दक्षिण मध्य सांस्कृतिक क्षेत्र (नागपुर, महाराष्ट्र), उत्तरी सांस्कृतिक क्षेत्र (पटियाला, पंजाब), उत्तर मध्य सांस्कृतिक क्षेत्र (इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश), पूर्वी सांस्कृतिक क्षेत्र (कोलकाता, पश्चिम बंगाल), पूर्वोत्तर सांस्कृतिक क्षेत्र (दीमापुर, नगालैंड) एवं पश्चिमी सांस्कृतिक क्षेत्र (उदयपुर, राजस्थान)। 

प्रत्येक सांस्कृतिक क्षेत्र का एक क्षेत्रीय मुख्यालय है, जहां क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना की गई है। इन क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों की विशेषता है कि राज्य अपने सांस्कृतिक संपर्कों के आधार पर एक से अधिक सांस्कृतिक केंद्रों के सदस्य हो सकते हैं।

 ज्यादातर सांस्कृतिक क्षेत्रों के क्षेत्रीय मुख्यालयों की स्थापना 1985 में हुई और उन्होंने 1986-87 के दौरान काम करना शुरू किया। इन सांस्कृतिक केंद्रों का घोषित उद्देश्य है-भारतीय संस्कृति की जड़ों को मजबूत बनाना और समग्र राष्ट्रीय संस्कृति को विकसित करना, ताकि प्रादेशिक एवं क्षेत्रीय सीमाओं के आरपार सांस्कृतिक भाईचारा बढ़ाया जा सके। 

इसके अलावा ये केंद्र अन्य क्षेत्रों की लोक कलाओं को भी प्रोत्साहित करने के लिए कार्यक्रम आयोजत करते हैं। ऐसे केंद्र विभिन्न लोक व जनजातीय कलाओं और दुर्लभ होती कलाविधाओं के संरक्षण के साथ-साथ अपने शिल्पग्राम के माध्यम से शिल्पियों को हाट सुविधाएं भी उपलब्ध कराते हैं। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता को देश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में भी जाना जाता है।

Monday, 24 February 2014

अर्बन हीट आइलैंड

अर्बन हीट आइलैंड

जब से दिल्ली की आबोहवा के बीजिंग से भी खराब होने की चर्चा चली है, तभी से पर्यावरण पर तरह-तरह के अध्ययन निष्कर्ष सामने आ रहे हैं। अभी हाल ही में एक संगठन ने सर्वे के जरिये बताया है कि दिल्ली के कई इलाके शहरी ग्रीष्म द्वीप (अर्बन हीट आइलैंड) बन गए हैं। 

अर्बन हीट आइलैंड (यूएचआई) वैसे महानगरीय इलाके को कहा जाता है, जो मानवीय गतिविधियों के कारण अपने आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में अत्यधिक गर्म होता है। इसके बारे में सबसे पहले चर्चा 1810 के दशक में ल्यूक हॉवर्ड ने की थी, हालांकि उन्होंने इसे नाम नहीं दिया था। 

यूएचआई प्रभाव मुख्यतः जमीन की सतह में परिवर्तन यानी बढ़ते शहरीकरण (जिसमें लघु तरंग विकिरण को संचित करने वाली सामग्रियों, जैसे कंकरीट, डामर आदि का उपयोग होता है) के कारण होता है। इसके अलावा ऊर्जा के उपभोग से उत्पन्न ताप में बढ़ोतरी, पेड़-पौधों में कमी, वाहनों की बढ़ती संख्या तथा बढ़ती आबादी का भी इसमें योगदान होता है।

 कभी-कभी ऐसे क्षेत्रों को भी ग्रीष्म द्वीप कहा जाता है, जहां की आबादी भले ही ज्यादा न हो, पर आसपास के इलाकों की तुलना में वहां का तापमान लगातार बढ़ता रहता है। न्यूयॉर्क, टोक्यो, मुंबई, दिल्ली जैसे महानगर शहरी ग्रीष्म द्वीप के उदाहरण हैं।

 यूएचआई की वजह से शहरों में वर्षा बढ़ जाती है। तापमान बढ़ने से फसलों के पकने का समय भी बढ़ जाता है। यूएचआई की वजह से प्रदूषण बढ़ता है, वायु एवं जल की गुणवत्ता घटती है, जिससे पारिस्थितिकी पर दबाव बनता है। मानव स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। यूएचआई शहरों में गर्म हवाओं (लू) के परिणाम एवं उसकी अवधि को बढ़ाते हैं, जिससे काफी मौतें होती हैं।

प्राइमरी चुनाव प्रणाली

प्राइमरी चुनाव प्रणाली
 
पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी की पहल पर कांग्रेस ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए प्रायोगिक तौर पर 16 संसदीय क्षेत्रों में उम्मीदवारों के चयन के लिए प्राइमरी चुनाव प्रणाली अपनाने की घोषणा की है। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो भविष्य में भी कांग्रेस उम्मीदवारों के चयन के लिए यह प्रक्रिया अपनाएगी। 

प्राइमरी चुनाव के जरिये कोई पार्टी चुनाव के लिए अपने प्रत्याशी का चयन करती है। इस प्रणाली का व्यापक प्रचलन अमेरिका में प्रगतिशील आंदोलन के दौरान हुआ, जब चयन का अधिकार पार्टी पदाधिकारियों से लेकर पंजीकृत मतदाताओं के हाथों में सौंप दिया गया। 

जहां प्राइमरी चुनाव प्रशासन के बजाय दलों द्वारा आयोजित होते हैं, वहां दो तरह से ये चुनाव होते हैं-क्लोज्ड यानी दलगत और ओपेन यानी गैर दलगत। दलगत चुनावों में केवल पार्टी के सदस्य ही उम्मीदवारों के चयन के लिए वोट डाल सकते हैं, जबकि गैर दलगत प्राइमरी चुनाव में मतदाता उम्मीदवारों का चयन करते हैं। प्राइमरी चुनाव प्रत्यक्ष एवं परोक्ष तरीके से भी हो सकता है। 

प्रत्यक्ष प्राइमरी चुनाव में मतदाता वोट डालकर उम्मीदवार का चयन करते हैं, जबकि परोक्ष प्राइमरी चुनाव में मतदाता अपने प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं और चुने हुए प्रतिनिधि उम्मीदवार मनोनीत करते हैं। राष्ट्रपति चुनाव के लिए पहली बार न्यू हैंपशायर ने 1916 में इसे अपनाया। 

हालांकि 1970 के दशक तक अमेरिका के 20 से कम राज्यों में ही इसका प्रयोग होता था, पर मीडिया द्वारा इसे महत्व दिए जाने से अन्य राज्यों ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई। प्रत्याशियों के चयन में पारदर्शिता एवं राजनीतिक स्वच्छता के लिहाज से महत्वपूर्ण यह प्रणाली यूरोपीय देशों, इटली, फ्रांस, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, चिली, उरुग्वे आदि में भी प्रचलित है।